खूबसूरत ये जहाँदिन कटे जब ठीक से तो है इनायत ये जहाँऔर गर्दिश के दिनों में बस क़यामत ये जहाँ रंग चश्मे का है कैसा देखते हैं किस तरह बात लेकिन सच यही कि है मुहब्बत ये जहाँ रोटियाँ भी जब मयस्सर हो नहीं आवाम को और रौनक कुछ घरों में तो अदावत ये जहाँ रात दिन कुछ सरफिरे जो बाँटते हैं खौफ को जब करोड़ों दिल अमन के है सलामत ये जहाँ क्या यहाँ पे खूबसूरत कौन अच्छे लोग हैं चैन हो दिल में सुमन तो खूबसूरत ये जहाँ |
बात वो लिखना ज़रा
भावना का जोश दिल में सीख लो रूकना ज़राहोनजाकत वक्त की तो वक्त पे झुकना ज़रा
जो उठाते जिन्दगी में हर कदम को सोच कर
जिन्दगी आसान बनकर तब लगे अपना ज़रा
लोग तो मजबूर होकर मुस्कुराते आज कल
है सहज मुस्कान पाना क्यों कठिन कहना ज़रा
टूटते तो टूट जाएँ पर सपन जिन्दा रहे
जिन्दगी है तबतलक ही देख फिर सपना ज़रा
दूरियाँ अपनों से प्रायः गैर से नजदीकियाँ
स्वार्थ अपनापन में हो तो दूर ही रहना ज़रा
खेल शब्दों का नहीं अनुभूतियों के संग में
बात लोगों तक जो पहुंचे बात वो लिखना ज़रा
जिन्दगी से रूठ कर के क्या करे हासिल सुमन
अबतलक खुशियाँ मिली जो याद कर चलना ज़रा
