शब्द मंगल
एक सृजनात्मक हिन्दी साहित्य का सोपान...."विश्वगाथा" (नया संस्करण) हमारी पत्रिका
Showing posts with label
चार लाईन
.
Show all posts
Showing posts with label
चार लाईन
.
Show all posts
Tuesday, August 9, 2011
पंकज त्रिवेदी की चार लाईन
दोस्त हूँ मैं तुम्हारा यह कहना ही कितना वाजिब हैं यार !
सर नहीं चाहिए, कभी कंधे पे रखने का मौका दिया होता !
दोस्ती पर अच्छा लिखकर वाह वाही लूँट लेती हो तुम,
कभी उसी लिखे पर जीने के लिए गौर फरमाया होता !!
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)