Wednesday, July 20, 2011

बेकल है आज दुनिया : श्यामल सुमन

 

कैसी अजीब दुनिया इन्सान के लिए
महफूज अब मुकम्मल हैवान के लिए
कातिल जो बेगुनाह सा जीते हैं शहर में
इन्सान कौन चुनता सम्मान के लिए
मिलते हैं लोग जितने चेहरे पे शिकन है
आँखें  तरस गयीं  हैं मुस्कान  के लिए
पानी ख़तम हुआ है लोगों की आँख का
बेकल है आज दुनिया ईमान के लिए
किस आईने  से  देखूँ   हालात आज के  
कुछ तो सुमन से कह दो संधान के लिए

2 comments:

  1. "पानी ख़तम हुआ है लोगों की आँख का
    बेकल है आज दुनिया ईमान के लिए"
    वाह! बहुत ही उम्दा ग़ज़ल...
    सादर....

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  2. मिलते हैं लोग जितने चेहरे पे शिकन है
    आँखें तरस गयीं हैं मुस्कान के लिए
    पानी ख़तम हुआ है लोगों की आँख का
    बेकल है आज दुनिया ईमान के लिए
    सुमन जी ...बेहतरीन गजल के लिए बधाईयां ..
    सादर अभिनन्दन !!!

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